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Sunday, November 18, 2007

हम कब कहेगें"गर्व से कहो हम भारतीय हैं"(भाग-१)

कुछ दिनों पहले एक पोस्ट पढ़ी थी जिस में हिन्दूओं को एक"हिन्दू आर्मी" में भरती होने का आवाहन दिया जा रहा था। ताकी हिन्दू धर्म की रक्षा हो सके। इसी तरह एक अन्य पोस्ट पर लिखा था "गर्व से कहो हम हिन्दू हैं।" पढ़ कर अजीब -सा एहसास हुआ। मैं पूछ्ना चाहता हूँ कि किस बात का गर्व करें हम हिन्दू हैं? क्या इस बात का कि देश में सर्वाधिक हिन्दू होनें के बावजूद भी देश में संप्रदायी जहर बढ़्ता जा रहा है फैलता जा रहा है या अपने ऐसे नारों से दूसरे अल्पसंख्यकों में भय का संचार करते रहनें का? यह सब पढ़ कर सोचनें को मजबूर हुआ कि क्या जिस देश को हम धर्मनिरपेक्ष देश कहते हैं, क्या यही वह धर्म निरपेक्ष देश है? जिस पर कभी सभी को गर्व था। क्या इस तरह की बातें यह साबित नही करती कि यहाँ धीरे-धीरे भीतर ही भीतर कोई आग सुलग रहा है? एक जहर घोला जा रहा है। यह जहर मात्र एक कौम या सिर्फ एक फिरका नही घोल रहा,बल्कि सभी कौमों और फिरकों द्वारा फैलाया जा रहा है।
कहीं मुसलमान कश्मीर की आजादी की बात कर के फैला रहा है तो कही विदेशों मे बैठे सिख खालिस्तान की आवाज उठा कर फैला रहे हैं। तो कहीं ईसाई मिशनरियां धर्म प्रचार का नाम लेकर हिन्दू ओं के धर्म परिवर्तन का ऎजैडा चला कर फैला रही हैं। गरीब व लाचार हिन्दू भाई-बहनों को साम,दाम,दंड व भेद की निति के आधार पर उन का धर्म परिवर्तन करवा कर हिन्दू समाज को नीचा दिखानें की कोशिश कर रही हैं। सभी अपनें -अपनें ढंग से यह जहर अपनें देश में घोलते जा रहें हैं। हमें इन बातों से शर्मिदा होना चाहिए कि गर्व करना चाहिए? यह सब हमारे अपने उस देश में हो रहा है जिस कि आजादी के लिए सभी ने मिलकर एक साथ इंकलाब का बिगुल बजाया था। जिस के लिए सभी कौमों नें मिल कर खून बहाया था। उसी देश में आज जो जहर घुलता जा रहा है उसे देख कर हम सभी भारतीय को चुल्लू-भर पानी में डूब मरना चाहिए। लेकिन हमें तो यानि कि सभी कौमों को अपनें -अपनें पर गर्व हो रहा है। हिन्दू छाती ठोंक कर कहना चाहता है कि "गर्व से कहो हम हिन्दू हैं"
वहीं मुस्लमान यह एह्सास कराना चाहता है कि "कश्मीर की आजादी के लिए जिहाद करने वाला मुसलमान ही सच्चा मुसलमान है।"वही ईसाई मिशनरियों को इस बात का गर्व है कि वह गरीब व मजलूमों को लालच व फरेब देकर ईसाई धर्म में ला कर बहुत नेक काम कर रहे हैं। और विदेश में बैठे सिखों को गर्व है कि वह खालिस्तान का जो बिगुल बजा रहें हैं वह एक दिन जरूर रंग लाएगा।(शेष अगले भाग में पढ़े)